India Is Not a Dharamshala for
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भारत धर्मशाला नहीं, देश और संस्कृति का सम्मान जरूरी: योगी आदित्यनाथ

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India Is Not a Dharamshala for

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को कहा कि जिन लोगों के मन में देश के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है तथा जो भारत की संस्कृति और संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने ‘लव जिहाद’, धर्मांतरण की साजिशों और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मुद्दों पर भी चेतावनी देते हुए समाज को सतर्क रहने का आह्वान किया।

लखनऊ में आयोजित श्री राम कथा महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श भारत को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एक सूत्र में बांधते हैं। कार्यक्रम में कथा वाचन Swami Rambhadracharya द्वारा किया गया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को तोड़ने वाली शक्तियां समय-समय पर जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास करती हैं, लेकिन संत समाज सदैव राष्ट्र को एकजुट करने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि राम कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि उसके संदेशों को जीवन में अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि जो व्यक्ति प्रभु श्रीराम के आदर्शों और मार्गदर्शन को अपने जीवन में अपनाता है, वह अनेक प्रकार की कठिनाइयों से उबरने की शक्ति प्राप्त करता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना भी की।

योगी ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों ने इसे केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत के सम्मान का विषय माना था। उन्होंने कहा कि संतों ने कभी श्रेय की अपेक्षा नहीं की, बल्कि राष्ट्र और समाज के हित में इस अभियान का समर्थन किया। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम भारतीय जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं और राम नाम में जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान निहित है।